Wednesday, August 26, 2026

 कभी याद आऊँ मैं भी, वक़्त मिले तो,

कभी याद आओ तुम भी, वक़्त मिले तो।


किताबों में दबे ख़त आज भी साँसें लेते हैं,

उन्हें पढ़ लेना कभी, वक़्त मिले तो।


तुम्हारे शहर में जब फिर से बारिश होगी,

मुझे सोचना कभी, वक़्त मिले तो।


वो जो कुछ कह न पाया, कविता में लिख दूँगा,

मुझे सुन लेना तुम भी, वक़्त मिले तो।


बहुत अरसे से तुम्हारा कोई ख़त नहीं आया,

मुझे लिख देना कुछ भी, वक़्त मिले तो।

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