जीते जी जिसे डर था मौत से,
मौत आई तो वो हँसता हुआ मिला।
उम्र भर जिसको माना मैंने रक़ीब,
आख़िरी पल वही देता दुआ मिला।
सच कहा तो हर किसी से रंजिश हुई,
झूठ कहा तो हर इक अपना मिला।
जिसे दुनिया ने समझा ख़ुशहाल,
उसके कमरे में तकिया गीला मिला।
घर लौटने की थी ख़ुशी बहुत मगर,
घर में इस बार एक कमरा कम मिला।
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