हर पल का हिसाब रखा
तेरी आमद के लिए
पर मेरे इंतजार का
कोई हिसाब नहीं मिला
किताबों के ढेर में
हर मौसम, बहार मिली
पर किसी किताब में
सूखा गुलाब नहीं मिला
उसने ख़त में अपने सारे
जज़्बात लिख दिए
बस मेरे सवाल का
कोई जवाब नहीं मिला
नज़र ने ढूँढा जिसे
वो इंतख़ाब नहीं मिला
वो शख्स तो मिला मगर
उसका हिजाब नहीं मिला