क्या है दिन, क्या है रात पता चली
लॉकडाउन में एक तो बात पता चली
घर में रहे तो अपनों को जान पाए
रिश्तों की असली सौग़ात पता चली
उनके बिना तन्हा गुज़ारी हुई उम्र
उनसे हुई जब मुलाक़ात पता चली
मोहब्बत जब शिद्दत से आगे बढ़ गई
तब जाके उसको मेरी जात पता चली
हम उम्र भर किसी हिसाब में उलझे रहे
वक़्त के हिसाब से मात पता चली