मुझे तुझ से यूँ तो
कोई शिकायत नहीं है फिर भी
मैं भी आज तुझ से
बेवजह रूठ कर देखूँ
यूँ तो मुझे रक़ीब पे
ज़्यादा यक़ीन है लेकिन
चल तेरी दोस्ती पे भी
एक दाँव लगाकर देखूँ
ख़ुदा के मौजूदगी पे
यक़ीन नहीं है मुझको
चलो तुम्हारी ख़ातिर
मुनाजात भी कर के देखूँ
मैं तुझे न पुकारूँ
बस याद कर के देखूँ
या अपनी तन्हाई को
एक शम्स बनाकर देखूँ
~ Vishal