Sunday, March 15, 2026

 मुझे लगता है कि क़लम से काग़ज़ पर कविता लिखना

बस एक रिवायत है,

असली कविता तो प्रेमी के लबों से

प्रेमिका की नंगी पीठ पर लिखी जाती है।


ना कोई स्याही,

ना किसी पन्नों की सरसराहट,


सिर्फ़ साँसों की गर्मी

और दिल की आहट।


क्योंकि कविता पढ़ी नहीं,

महसूस की जाती है।


~ Vishal

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