मुझे लगता है कि क़लम से काग़ज़ पर कविता लिखना
बस एक रिवायत है,
असली कविता तो प्रेमी के लबों से
प्रेमिका की नंगी पीठ पर लिखी जाती है।
ना कोई स्याही,
ना किसी पन्नों की सरसराहट,
सिर्फ़ साँसों की गर्मी
और दिल की आहट।
क्योंकि कविता पढ़ी नहीं,
महसूस की जाती है।
~ Vishal
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