Thursday, April 30, 2026

मैंने तुझसे तो बे-लौस ही तअल्लुक़ चाही,  

तेरी जानिब से भी अपनी न कोई तस्दीक़ चाही।


तुझसे मोहब्बत की ये शिद्दत ही काफ़ी थी मुझे,  

और न इस दिल ने कोई और तौफ़ीक़ चाही।


दिल ने हर ख़्वाब तेरे नाम से रौशन कर के,  

ख़ुद से भी फिर न कोई और तहरीक़ चाही।


तेरे क़दमों की सदा में ही मुझे मिला सुकूँ,  

और दुनिया से न कोई भी तरतीब चाही।


तू मिला तो लगा जैसे मिली हो मंज़िल मुझको,  

और फिर तक़दीर से भी कोई न तदबीर चाही।


~ Vishal

Saturday, April 18, 2026

 तुमसे ख़्वाब में भी मुहब्बत गुनाह हो जाना

मेरे लब तक आना और फ़ना हो जाना


मेरी रूह का तेरे दर्द से राब्ता हो जाना

और फिर तेरी ख़ामोशी ही पनाह हो जाना


तेरी यादों का मेरी साँसों में बसना यूँ,  

जैसे हर धड़कन का कोई गवाह हो जाना।  


मेरी नज़्मों में कहीं भी तेरा ज़िक्र नहीं,

और खामोशियों में तेरा बयाँ हो जाना।


मैंने चाहा भी तुझे, और इन्कार भी रखा, 

ये मुहब्बत का अजब सा निज़ाम हो जाना।


मैं नज़्म था तेरा, जो लफ़्ज़ों में उतर न सका,

तू एक सफ़ह था - और मुझमें ही गुमाँ हो जाना।


~ Vishal

Friday, April 10, 2026

 मुझको भरम था इश्क़ है, दरिया का साहिल कहना,

दिल को मगर पड़ा है अब खुद से ही ग़ाफ़िल कहना।


आँखों से रात भर आँसू जो बेआवाज़ गिरे,

सुबह हुई तो उसे दर्द का हासिल कहना।


बाप ने सर पे हाथ जो रक्खा तो यूँ लगा,

उम्र भर उस ही लम्हे को रहा “काबिल” कहना।


महफ़िल में लोग थे, हर एक अपने में मगन,

हम ही को आ गया खुद को यहाँ जाहिल कहना।


दिल टूट के भी रहा उस ही गली में आख़िर,

अपनी ही ज़िद को ठहरा इश्क़ का क़ातिल कहना।


~ Vishal

Monday, April 6, 2026

 वो जो कहते थे  

तुम्हारे बिन एक पल भी न रह पाएंगे  

जी न पाएंगे  

मर जाएंगे  


तुम घर हो और ख़ुदा का दर भी  


उसने मेरे ही शहर में अपना घर सजाया है  

घर को ही इबादतगाह बनाया है  


उसे झुठलाए पर शर्म की बात होगी  

ये शै तो मेरे नाम होगी


~ After reading 'Jaun'