Thursday, April 30, 2026

मैंने तुझसे तो बे-लौस ही तअल्लुक़ चाही,  

तेरी जानिब से भी अपनी न कोई तस्दीक़ चाही।


तुझसे मोहब्बत की ये शिद्दत ही काफ़ी थी मुझे,  

और न इस दिल ने कोई और तौफ़ीक़ चाही।


दिल ने हर ख़्वाब तेरे नाम से रौशन कर के,  

ख़ुद से भी फिर न कोई और तहरीक़ चाही।


तेरे क़दमों की सदा में ही मुझे मिला सुकूँ,  

और दुनिया से न कोई भी तरतीब चाही।


तू मिला तो लगा जैसे मिली हो मंज़िल मुझको,  

और फिर तक़दीर से भी कोई न तदबीर चाही।


~ Vishal

No comments:

Post a Comment