Friday, June 26, 2026

 हर दर पे उम्र भर की सदाएँ भी बेअसर,

शायद अभी अपने ही मकाँ की तलाश में हो।


मंदिर भी गए, मस्जिदों से लौट आए तुम,

फिर किस ख़ुदा की तलाश में हो।


दरिया ने बस इतना ही पूछा बहाव में,

किस बेनिशाँ किनार की तलाश में हो।


जो खो गया था, वो तो तुम्हारे ही पास था,

फिर किस और आसमाँ की तलाश में हो।


शायद ये सफ़र ख़त्म न हो उम्र भर,

जब तक तुम अपनी ही तलाश में हो।

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