Thursday, June 4, 2026

 थोड़ी देर रुक जाओ, अभी तो रात बाकी है,

खामोशियों की तह में एक मुलाकात बाकी है।


तुम अगर सुन लो तो मुकम्मल हो ये अफ़साना,

मेरी ख़ामोशी में अभी कुछ बयानात बाकी हैं।


चाँद भी ठहरा हुआ है आसमान की देहलीज़ पर,

सितारों की आँखों में कुछ सवालात बाकी हैं।


यूँ तो नज़रों ने कई दफ़ा कह दी दास्ताँ अपनी,

मगर दिल के सफ़्हों पर कुछ एहसासात बाकी हैं।


वक़्त की रेत ने ढक दिए हैं कई क़िस्से मगर,

तेरी यादों के अभी कुछ निशानात बाकी हैं।


न जाओ इस क़दर कि रात अधूरी रह जाए,

कि इस रात में अभी कुछ जज़्बात बाकी हैं।

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