जब धूप से पैर जलने लगे,
चलकर पैर में छाले पड़ने लगे।
जब दुनिया की सारी ख़ूबसूरती ढल गई,
तब तुझे घर याद आया।
जब अपने अजनबी लगने लगे,
हर चेहरे पर नक़ाब दिखने लगे।
जब भीड़ में कोई अपना न मिला,
तब तुझे शहर याद आया।
जब राह में तन्हाई पाई,
और मंज़िल भी रास न आई,
तब लौटकर आया है तू,
घर था याद या घर याद आया?
No comments:
Post a Comment