Monday, October 12, 2026

 तुम मेरी नहीं, फिर भी ये ख़याल क्यों है,

तुम्हें खोने का दिल को मलाल क्यों है?


न कोई इकरार है, न कोई इनकार,

फिर तेरी आँखों में यूँ सवाल क्यों है?


माना मेरी हथेली पर तेरे नाम की लकीर न थी,

फिर तेरे बिना ये ज़िंदगी बेहाल क्यों है?


तेरा ज़िक्र छिड़े तो महफ़िल निखर जाती है,

तेरे ज़िक्र से ये महफ़िल बेमिसाल क्यों है?

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