Monday, September 7, 2026

 अब तुझसे भी नाराज़ हूँ मैं इसलिए,

तुझे देखा तो कोई और याद आया।

तेरे क़रीब था, फिर भी अजीब हालत थी,
पास रहकर भी कोई दूर याद आया।

तूने पूछा कि क्यों ख़ामोश हूँ इतना मैं,
क्या बताता कि कोई और याद आया।

तेरे आने से सजी महफ़िलें कुछ देर मगर,
तेरे जाने पर मुझे अपना घर याद आया।

अब किसी से भी शिकायत नहीं करता हूँ मैं,
जिससे रूठा था वही बार-बार याद आया।

तेरे क़दमों की आहट जब सुनाई दी मुझे,
किसी के लौटने का इंतज़ार याद आया।

तेरे जाने के बाद देर तलक सोचता रहा,
क्यों मुझे फिर वही इतवार याद आया।


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