जो सुनाती है मुझे चाँद-तारों की कहानी,
मैं उसको कहानी तेरी सुनाता हूँ।
वो कहती है, “भूल जाओ जो बीत गया है,”
मैं बीते हुए कल की ताज़गी सुनाता हूँ।
उसे यक़ीन है कि वक़्त सब भुला देता है,
मैं वक़्त के ही भीतर उसकी कमी सुनाता हूँ।
वो पूछती है, “मोहब्बत में क्या बचा आख़िर?”
मैं टूटे हुए दिलों की ज़िंदगी सुनाता हूँ।
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